राजस्थान के ब्यावर से उठी आवाज बनी राष्ट्रीय आंदोलन, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बना ऐतिहासिक कानून
रिपोर्टर: शिंभू सिंह शेखावत
12 अक्टूबर। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को लागू हुए आज 21 वर्ष पूरे हो गए। 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुए इस कानून ने आम नागरिकों को सरकारी कामकाज, योजनाओं पर खर्च और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जानकारी मांगने का कानूनी अधिकार दिया। इसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता बढ़ाना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में नागरिकों की भूमिका मजबूत करना और सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाना था।
राजस्थान से शुरू हुई अधिकार की लड़ाई
सूचना के अधिकार आंदोलन की शुरुआत राजस्थान में मजदूरों के हक और सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता की मांग से हुई। मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) ने मजदूरी भुगतान, विकास कार्यों और सरकारी खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने के लिए जनसुनवाई के माध्यम से आंदोलन चलाया। वर्ष 1996 में ब्यावर के चांग गेट पर हुआ लंबा धरना इस संघर्ष का अहम पड़ाव बना। स्थानीय स्तर पर शुरू हुई यह मांग आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलन में बदल गई।
संसद से कानून बनने तक का सफर
RTI विधेयक 11 मई 2005 को लोकसभा और 12 मई को राज्यसभा में पारित हुआ। राष्ट्रपति की मंजूरी 15 जून 2005 को मिली और 12 अक्टूबर 2005 से कानून देशभर में लागू हो गया। इसके तहत नागरिक सरकारी विभागों से निर्धारित नियमों के अनुसार दस्तावेज, आदेश, रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड मांग सकते हैं। सामान्य मामलों में सूचना देने की समय-सीमा 30 दिन, जबकि जीवन या स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे निर्धारित है।
भ्रष्टाचार उजागर करने का बना माध्यम
सूचना के अधिकार ने पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर अनियमितताओं पर सवाल उठाने की ताकत दी। आदर्श हाउसिंग सोसायटी, 2G स्पेक्ट्रम और कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े विवादों की पड़ताल में भी RTI से प्राप्त सूचनाओं की भूमिका रही। हालांकि, इन मामलों के खुलासों में अन्य जांचों, दस्तावेजों और पत्रकारिता का योगदान भी रहा।
RTI कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल
कानून लागू होने के 21 वर्ष बाद भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। सूचना देने में देरी, अपीलों का लंबित रहना और सूचना मांगने वाले कार्यकर्ताओं को कथित धमकियां तथा हमलों का सामना करना गंभीर चिंता के विषय हैं। विभिन्न मामलों में RTI कार्यकर्ताओं की हत्या की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और सूचना मांगने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
लोकतंत्र में पारदर्शिता की अहम कड़ी
सूचना का अधिकार केवल सरकारी जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण साधन है। इसकी वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब नागरिकों को समय पर सूचना मिले, सूचना मांगने वालों की सुरक्षा हो और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।
RTI दिवस पर यह सवाल फिर प्रासंगिक है कि जिस कानून का उद्देश्य शासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना था, उसे जमीनी स्तर पर और प्रभावी कैसे बनाया जाए। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि सूचना मांगने वाले नागरिक के अधिकार और सुरक्षा, दोनों का सम्मान किया जाए।




