दुर्घटनाग्रस्त नंदी को समय पर मिला उपचार, श्रीजी सेवा समिति की तत्परता की सराहना
रिपोर्टर : शिंभू सिंह शेखावत
नीमकाथाना। भूदौली रोड पर शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में मिले नंदी महाराज को समय पर उपचार मिलने से एक ओर जहां सेवाभावी लोगों की तत्परता सामने आई, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में स्थायी गौ एंबुलेंस और उपचार सुविधा की आवश्यकता भी चर्चा में आ गई।
19 सितंबर को भूदौली रोड पर नंदी महाराज के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना श्रीजी सेवा समिति को मिली। सूचना मिलते ही समिति के कार्यकर्ता और गोरक्षक मौके पर पहुंचे। समिति के अनुसार नंदी के तीन खुर टूटे हुए थे और दोनों पैरों से रक्तस्राव हो रहा था। सूचना पर राजकीय पशु चिकित्सालय के अधिकारी डॉ. बायला चिकित्सकीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और प्राथमिक उपचार किया।
प्राथमिक उपचार के बाद नंदी को आगे की चिकित्सा के लिए मणकसास स्थित ओम जनता उपचारशाला भेजा गया। इसके लिए आवश्यक टेंपो किराया श्रीजी सेवा समिति द्वारा वहन किया गया।
स्थायी व्यवस्था की उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर घायल गोवंश के लिए तत्काल परिवहन और उपचार की स्थायी व्यवस्था की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना या गंभीर चोट की स्थिति में समय पर गौ एंबुलेंस उपलब्ध होने से घायल पशु को जल्द उपचार केंद्र तक पहुंचाया जा सकता है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों, गौशाला संचालकों, भामाशाहों और प्रशासन के सहयोग से ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की जा रही है, जिससे जरूरत पड़ने पर किसी बाहरी क्षेत्र की एंबुलेंस पर निर्भरता कम हो।
चारागाह और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर
गोवंश संरक्षण को केवल घायल पशुओं के उपचार तक सीमित रखने के बजाय चारागाह भूमि, नदी और नालों के संरक्षण से भी जोड़ने की जरूरत बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों पर चारागाह भूमि में खनन गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इन शिकायतों की संबंधित विभागों द्वारा राजस्व रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण के आधार पर जांच की मांग की गई है।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। चारागाह भूमि पशुपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गोवंश के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है।
घोषणा नहीं, स्थायी व्यवस्था की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोसेवा के प्रति समाज में भावनाएं और सहयोग दोनों मौजूद हैं। अब जरूरत इन्हीं प्रयासों को स्थायी व्यवस्था का रूप देने की है। नीमकाथाना शहर में गौ एंबुलेंस, आपातकालीन पशु चिकित्सा सुविधा और एक समन्वित हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था विकसित होने से दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल सहायता मिल सकती है।
यदि आवश्यकता पड़ने पर नांगल चौधरी या हरियाणा क्षेत्र से एंबुलेंस की सहायता लेनी पड़ती है, तो यह स्थानीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
यह मुद्दा किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन के विरोध का नहीं, बल्कि जीवदया और जनहित से जुड़ा विषय है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन, जनप्रतिनिधि, गौशाला संचालक, गोभक्त, सामाजिक संगठन और भामाशाह मिलकर पारदर्शी व्यवस्था तैयार करें तो घायल गोवंश को समय पर उपचार मिल सकता है।
आज एक नंदी को मदद की जरूरत पड़ी है, कल किसी और गोवंश को पड़ सकती है। सवाल केवल यह नहीं कि सेवा कौन करेगा, बल्कि यह है कि जरूरत के समय सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध होगी।




