स्थायी कर्मचारी का दर्जा, वेतन वृद्धि सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन; नोटिस जारी होने पर उठे सवाल
नीमकाथाना। राजस्थान भर में चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका आंदोलन के बीच नीमकाथाना में कारण बताओ नोटिस जारी होने से नया विवाद खड़ा हो गया है। सीटू के नेतृत्व में गुरुवार को संतोषी माता मंदिर परिसर में आयोजित विशाल आमसभा के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर सीडीपीओ कार्यालय और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के नाम 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महामंत्री बृजसुंदर जांगिड़ ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं लंबे समय से स्थायी कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम ₹26 हजार मासिक वेतन, मानदेय वृद्धि तथा गैर-विभागीय कार्यों से मुक्ति जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना था कि वर्ष 2018 के बाद से मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान में राजस्थान में कार्यकर्ताओं को लगभग ₹10 हजार और सहायिकाओं को करीब ₹6,500 मानदेय मिल रहा है, जिसे उन्होंने देश में सबसे कम बताया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कर्मियों से विभागीय कार्यों के अलावा अन्य विभागों के काम भी कराए जाते हैं। पुराने मोबाइल फोन, सीमित रिचार्ज राशि और दूरदराज क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण पोषण ट्रैकर व अन्य योजनाओं के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से संगठन के साथ वार्ता कर जल्द समाधान निकालने की मांग की।
सभा को कंचन वर्मा, पिंकी देवी, उच्छव कंवर, सरिता, आशा, रघुवीर बारेठ, रतन सिंगल, विनय प्रकाश सैनी, विक्रम सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। इस दौरान 27 जुलाई से सीकर जिला कलेक्ट्रेट पर प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरने को सफल बनाने का भी आह्वान किया गया।
ज्ञापन के बाद नोटिस पर विवाद
यूनियन का आरोप है कि ज्ञापन सौंपने के दौरान सीडीपीओ कार्यालय में अधिकारी मौजूद नहीं थे और ज्ञापन अन्य कर्मचारियों को दिया गया। इसके बाद गुहाला सेक्टर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए। इनमें कंचन वर्मा, दुर्गा देवी, मंजू कादिया, सुमन देवी, सरोज देवी, मोहित कुमारी सैनी, उच्छव कंवर, सुनीता देवी, सुनीता शर्मा और अनिता सैनी सहित कई नाम शामिल बताए गए हैं।
संगठन का कहना है कि जब आंदोलन पूरे राजस्थान में सामूहिक रूप से चल रहा है, तब केवल कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी करना महिला कर्मियों पर दबाव बनाने जैसा है। यूनियन ने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारियों को अपनी मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से ज्ञापन देने का भी अधिकार नहीं है।
यूनियन ने सरकार से मांग की है कि जारी नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं, आंदोलनरत आंगनबाड़ी कर्मियों के साथ सकारात्मक वार्ता शुरू की जाए तथा उनकी लंबित 14 सूत्रीय मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए।



