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एमसीएच अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद धरना, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, चिकित्सकों ने कहा— प्रोटोकॉल के अनुसार हुआ उपचार, समय पर किया गया रेफर
नीमकाथाना। नव निर्मित मातृ एवं शिशु (एमसीएच) अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद गुरुवार को अस्पताल परिसर के बाहर परिजनों और ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन किया। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों का कहना है कि मरीज का उपचार निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया तथा गंभीर स्थिति होने पर समय रहते उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार ग्राम खादरा निवासी अंजली सैनी की 14 जुलाई को एमसीएच अस्पताल में ऑपरेशन के माध्यम से डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद दोपहर करीब 3:30 बजे अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) शुरू हुआ। चिकित्सकों के अनुसार तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया, लेकिन मरीज का ब्लड ग्रुप O नेगेटिव होने और आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण शाम करीब 5 बजे उसे जयपुर रेफर कर दिया गया। परिजन मरीज को जयपुर ले जाने के बजाय बराला अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान 16 जुलाई की देर रात उसकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते पर्याप्त उपचार और रक्त की व्यवस्था हो जाती तो प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी। इसी मांग को लेकर वे अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मेडिकल बोर्ड से निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई तथा आर्थिक सहायता की मांग की। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच दो दौर की वार्ता हुई, लेकिन देर शाम तक कोई सहमति नहीं बन सकी। धरने में सामाजिक कार्यकर्ता विनोद भूदौली, गोपाल सैनी, मंजू सैनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एहतियात के तौर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।
चिकित्सकों का पक्ष
अस्पताल में कार्यरत डॉ. गुमान सिंह यादव ने बताया कि प्रसूता का उपचार समय पर किया गया। उनके अनुसार शुरुआत में ही परिजनों को मरीज के O नेगेटिव ब्लड ग्रुप की जानकारी दे दी गई थी। परिजन रक्त की व्यवस्था कर लाए, जिसके बाद रक्त चढ़ाया गया और आवश्यक जांच के उपरांत सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। डॉ. यादव ने बताया कि डिलीवरी के बाद अचानक ब्लीडिंग शुरू होने पर उन्होंने और डॉ. हेमंत कटारिया ने तत्काल उपचार किया। स्थिति गंभीर होने तथा आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण बिना विलंब मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया और परिजनों को पूरी चिकित्सकीय जानकारी भी दी गई।
अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
घटना के बाद कुछ लोगों ने नव शुरू हुए एमसीएच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों, पर्याप्त रक्त उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को पूरी तरह विकसित करने के बाद ही अस्पताल का संचालन शुरू किया जाना चाहिए था। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट का इंतजार करना उचित होगा।
जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
यह मामला एक परिवार के लिए अत्यंत दुखद है। ऐसे मामलों में यदि उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं यदि चिकित्सकों ने निर्धारित मानकों के अनुसार उपचार किया है, तो यह भी जांच के माध्यम से स्पष्ट होना आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन परिजनों से संवाद के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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