सागर। चकराघाट स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास रहने वाली 52 वर्षीय श्रीमती भारती जैन का सड़क दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया। गहरे शोक के बीच उनकी तीनों बेटियों—प्रियांशी, गुंजन और मिनी—ने मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनका मरणोपरांत नेत्रदान कराया। इस प्रेरणादायी निर्णय से दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है।
परिजनों ने बताया कि श्रीमती भारती जैन जीवनकाल में नेत्रदान करने की इच्छा व्यक्त करती थीं। उनके निधन के तुरंत बाद दामाद प्रखर जैन ने ‘मोहन फाउंडेशन’ को सूचना दी, जिसके बाद बीएमसी सागर के आई बैंक की इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान के निर्देशन में टीम ने समय पर पहुंचकर परिजनों की सहमति से कॉर्निया सुरक्षित निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया।
बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने जैन परिवार के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि दुख की घड़ी में भी परिवार ने मानवता की मिसाल पेश की है। वहीं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने भी परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया।
इस प्रक्रिया में डॉ. अंजलि वीरानी पटेल, डॉ. पुरवा, डॉ. मोदी, डॉ. अजय, डॉ. हर्षिता, नर्सिंग स्टाफ राम लखन मीणा, ओमप्रकाश कुमावत एवं पैरामेडिकल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चिकित्सकों ने बताया कि नेत्रदान वास्तव में कॉर्निया दान है, जिसे मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर किया जाना आवश्यक होता है। बीएमसी सागर के आई बैंक में यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है। नेत्रदान संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन 7697271108 पर संपर्क किया जा सकता है।

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