विजय निरंकारी । सागर
सागर नगर निगम में सबसे ज्यादा राजस्व की वसूली हो रही है। शासन से भी पर्याप्त फंड आ रहा है लेकिन कर्मचारियों को वेतन देने निगम के पास पैसे नहीं है। कुछ कर्मचारियों का 3 महीने तो कुछ का 2 महीने से वेतन अटका है। हालत यह है कि कोई कर्मचारी अपने बच्चों की फीस नहीं भर पा रहा है तो कोई अपने वृद्ध माता-पिता का इलाज नहीं कर पा रहा है। एक कर्मचारी ने तो अपनी बाइक गिरवी रखकर बच्चों की फीस भरी। सागर नगर निगम आयुक्त सागर को स्मार्ट सिटी भरने का दम भरते हैं लेकिन जिन लोगों की दम पर निगम चल रही है और सागर स्मार्ट बन रहा है उनके लिए ही वेतन देने के लाले पड़े हैं।
नगर निगम मगर स्थिति यही नहीं समझ रही कि किसी का परिवार बिना वेतन के कैसे चलेगा ?किसी को गाड़ी की किस्त भरनी है तो किसी के बच्चों की फीस किसी को दवाई खरीदनी है जिनके पैसे उनके पास नहीं है। ऐसे में निम्न वर्ग का कर्मचारी अपने परिवार का लालन पोषण कैसे करें । स्वच्छता का दम भरने वाली नगर निगम वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को देने के लिए पैसे तक नहीं ऐसे में उन लोगों की स्थिति को समझना नगर निगम को शायद नहीं आ रहा है जहां अधिकारी अपने केबिन में बैठकर अपनी नौकरी का आनंद ले रहा है। वहीं दूसरी ओर अधीनस्थ कर्मचारी अपने परिवार की रोजी-रोटी के लिए मशक्कत कर रहा है। जब इसकी पूरी जानकारी ली गई एक कर्मचारी ने बताया बच्चों की फीस भरनी थी एग्जाम से तो उन्होंने अपनी गाड़ी गिरवी रखकर बच्चों की फीस भरी। वही एक दूसरे कर्मचारियों ने की सुने की दवाई के लिए पैसे नहीं थे तो बाजार से पैसे उधार लेकर दवाई करेगी। ऐसे में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा लगातार मंदिरों से लेकर अधिकारियों तक फरियाद लगाई जा रही है कि उनका वेतन नियमित दिलवाया जाए।




