*मां, बहन, बेटी की गाली न देने का लिया गया संकल्प
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हरियाणा
वैचारिक स्वच्छता अभियान के तहत समाज में ‘मां, बहन, बेटी की गाली मुक्त भारत’ का संकल्प जन-जन तक पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी है। इसी क्रम में हरियाणा के सालन गांव में इस मुहिम की नई अलख जगाई गई।
भारत परिक्रमा पर निकली एडवेंचरस महिला डॉ. अंशुजा कीमतकर को सागर प्रवास के दौरान वैचारिक स्वच्छता अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था। उन्होंने अपनी सहयात्री समाजसेवी श्रीमती लक्ष्मी माथेर के साथ सालन गांव पहुंचकर ग्रामीणों को ‘मां, बहन, बेटी की गाली न देने’ का संकल्प दिलाया।
डॉ. कीमतकर ने कहा कि — “शब्द हमारी संस्कृति का दर्पण हैं। जब तक समाज की भाषा स्वच्छ नहीं होगी, तब तक मानसिक स्वच्छता संभव नहीं है।”
लक्ष्मी माथेर ने भी ग्रामवासियों से आह्वान किया कि वे अपने परिवारों, विद्यालयों और कार्यस्थलों पर इस संदेश को प्रसारित करें, ताकि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और सद्भाव का वातावरण बने।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैचारिक स्वच्छता अभियान की शपथ लेकर यह संदेश दिया कि “गाली नहीं, सम्मान ही हमारी पहचान है।”
संस्थापक – डॉ. वंदना गुप्ता ने बताया कि अभियान का उद्देश्य है समाज के हर वर्ग तक यह जागरूकता पहुँचाना कि मानसिक स्वच्छता ही वास्तविक स्वच्छता की पहली सीढ़ी है।
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