
सागर
स्वच्छता को लेकर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री अपने सख्त रवैये के कारण इन दिनों चर्चा में हैं। शहर में जगह-जगह गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ उनका अभियान एक नजरिए से बेहद कारगर कदम साबित हो रहा है।
स्वच्छता को महत्व देने वाली जनता भी उनके इस कदम की सराहना कर रही है। लोगों का कहना है कि अगर शहर को साफ-सुथरा बनाना है, तो ऐसी सख्ती जरूरी है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि सिर्फ नगर निगम ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा।
नगर पालिक निगम सागर द्वारा अब POS मशीनों का उपयोग शुरू कर दिया गया है। इसके तहत हर वार्ड में यह मशीन उपलब्ध होगी, जिससे गंदगी फैलाने वालों पर मौके पर ही तुरंत चालान काटा जाएगा।
इस व्यवस्था से आम जनता को भी यह स्पष्ट होगा कि वसूला गया जुर्माना सीधे सरकारी खजाने में जा रहा है, जिसका उपयोग अंततः शहर के विकास और सुविधाओं के लिए ही किया जाएगा।
स्वच्छता अभियान में सख्ती से बदल रही शहर की तस्वीर, आयुक्त राजकुमार खत्री की पहल चर्चा में
शहर में स्वच्छता को लेकर चल रही सख्ती अब साफ तौर पर असर दिखाने लगी है। राजकुमार खत्री के नेतृत्व में नगर निगम का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है, जिससे लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है।
पहले जहां सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम कचरा फेंकना आम बात थी, वहीं अब POS मशीन के जरिए मौके पर ही चालान होने की व्यवस्था ने लोगों को सतर्क कर दिया है। नगर पालिक निगम सागर द्वारा उठाया गया यह कदम तकनीक और सख्ती का बेहतरीन मेल माना जा रहा है।
नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री का कहना है कि इस अभियान का मकसद सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाना है। लगातार कार्रवाई से अब कई इलाकों में साफ-सफाई का स्तर बेहतर हुआ है।
वहीं, शहर के जागरूक नागरिकों का भी मानना है कि अगर इसी तरह सख्ती और निरंतरता बनी रही, तो सागर शहर जल्द ही स्वच्छ शहरों की सूची में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सिर्फ चालान से ही समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। इसके लिए कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था, पर्याप्त डस्टबिन और नियमित सफाई भी उतनी ही जरूरी है।
कुल मिलाकर, स्वच्छता को लेकर प्रशासन और जनता दोनों की संयुक्त भागीदारी ही शहर को साफ और सुंदर बना सकती है।




