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गुरुदेव भगवान संत राजेंद्रदास महाराज का सागर में भव्य स्वागत, 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने ली गुरु दीक्षा

सागर। झीलों की नगरी सागर में गुरुवार को आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला। मलूक पीठाधीश्वर एवं अग्रपीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित श्रीमज्जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज के एक दिवसीय प्रवास पर शहरभर के श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, आरती और पूजन के साथ भव्य स्वागत किया। गुरुदेव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जबकि 200 से अधिक भक्तों ने गुरु दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन का संकल्प लिया।
गुरुदेव भगवान का स्वागत ग्राम सानोंधा से प्रारंभ हुआ। इसके बाद शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूजन महोत्सव में संत राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज के साथ अनेक संत-महात्मा शामिल हुए। अजब श्री सेवा समिति, अजब धाम एवं मलूक पीठ परिवार (दमोह एवं सागर) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में महंत श्री राम अनुग्रह दास महाराज (छोटे सरकार) का भी भक्तों को सानिध्य मिला।
तिली रोड स्थित रॉयल पैलेस होटल सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए संत राजेंद्रदास देवाचार्य ने गौ माता की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ का वास्तविक आधार गौ माता है और गौ एवं गव्य पदार्थों के बिना वैदिक परंपरा अधूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है तथा ऋषियों से भी ऊंचा स्थान दिया गया है।
उन्होंने गौवंश संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज प्रतिदिन हजारों गायों का वध किया जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसी उद्देश्य से 27 जुलाई को प्रत्येक जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण ढंग से श्रीराम भजन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया कि सागर जिले में गौ रक्षा के समर्थन में 5 लाख हस्ताक्षर कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक लगभग 1 लाख हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
गुरुदेव ने गुरु दीक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि दीक्षा कभी जल्दबाजी में नहीं लेनी चाहिए। पहले अपने आचार, विचार और व्यवहार को शुद्ध करना आवश्यक है, तभी गुरु दीक्षा सार्थक होती है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र संत श्री भक्त माली भगवान को अत्यंत प्रिय था, इसलिए यहां के श्रद्धालुओं को मलूक पीठ की दीक्षा सहज रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि महंत श्री राम अनुग्रह दास महाराज (छोटे सरकार) के विशेष आग्रह पर ही उनका सागर आगमन हुआ है।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर संत श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर अजब श्री सेवा समिति एवं मलूक पीठ परिवार के पं. प्रमोद उपाध्याय, पं. ऐश्वर्य पाठक, पं. सचिन शुक्ला, पं. हनुमान मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार पं. अनिल दुबे, सुमित अग्रवाल, पं. तोषु पाण्डेय, पं. सौरभ मिश्रा, पं. मुकेश तिवारी, पं. अंकित मिश्रा, प्रमोद पटेल सहित बड़ी संख्या में शिष्य मंडल के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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