निरीक्षण से पहले क्रेशर बंद कराने का ग्रामीणों का आरोप, निष्पक्ष जांच और वास्तविक संचालन के दौरान प्रदूषण मापने की मांग
रिपोर्टर—शिंभू सिंह शेखावत
नीमकाथाना/पाटन। ग्राम स्यालोदड़ा के क्रेशर जोन में 25 सितंबर को प्रदूषण विभाग द्वारा की जा रही जांच को लेकर ग्रामीणों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण विभाग की टीम के पहुंचने से करीब पांच घंटे पहले ही क्रेशर बंद करवा दिए गए। ऐसे में बंद क्रेशरों की स्थिति में की जा रही जांच से वास्तविक संचालन के दौरान होने वाले धूल और प्रदूषण का सही आकलन कैसे होगा, यह सवाल ग्रामीणों ने उठाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निरीक्षण से पहले ही क्रेशर बंद कर दिए जाएं तो जांच के दौरान प्रदूषण की वास्तविक स्थिति सामने आना मुश्किल है। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा पूर्व सूचना देकर क्रेशर बंद करवाए गए हैं तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता
ग्रामीणों के अनुसार स्यालोदड़ा क्षेत्र में लंबे समय से धूल प्रदूषण को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि इसका प्रभाव केवल क्रेशर में काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाले नागरिकों, किसानों, बच्चों और पशुओं पर भी पड़ सकता है। ग्रामीणों ने धूल से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं और पूर्व में हुई मौतों के संदर्भ में वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
क्रेशर जोन की जांच बिना पूर्व सूचना और वास्तविक संचालन की स्थिति में कराई जाए।
जांच की पूरी वीडियोग्राफी कर समय, स्थान और क्रेशरों की संचालन स्थिति रिकॉर्ड की जाए।
निरीक्षण से पहले क्रेशर बंद करवाने की सूचना देने वाले व्यक्ति/अधिकारी की जांच हो।
PM10, PM2.5 सहित अन्य प्रदूषण मानकों की स्वतंत्र एवं वास्तविक समय में निगरानी कराई जाए।
प्रदूषण नियंत्रण, खनन और वन विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
चिड़ीमार पहाड़ एवं वन क्षेत्र में अवैध खनन अथवा अवैध रास्तों की शिकायतों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य, कृषि भूमि, पेयजल और पर्यावरण पर प्रभाव का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि स्यालोदड़ा की जनता किसी विभाग से टकराव नहीं चाहती, बल्कि वास्तविक स्थिति पर आधारित निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई चाहती है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उद्योग और आमजन के हितों के बीच कानून के अनुसार संतुलन बनाए और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी जांच में वास्तविक स्थिति छिपी न रहे।



