
सागर
सियासत में अक्सर ओहदे बड़े हो जाते हैं,लोग छोटे पड़ जाते हैं। परंतु कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो ओहदे से नहीं,अपनी सादगी और सेवा भाव से महान बनती हैं। ऐसी ही शख्सियत का नाम है — शैलेंद्र कुमार जैन, जो आज केवल सागर विधानसभा के विधायक नहीं, बल्कि सागरवासियों के लिए अपने हैं, अपने घर के सदस्य हैं — शैलेंद्र भैया हैं।
*हर द्वार पर सलाह, हर मन में सम्मान*
शहर की गली-गली,चौराहे,मोहल्ले और गांव की चौपाल — शायद ही कोई कोना ऐसा हो जहां शैलेंद्र भैया की पहुंच न हो। नगर विकास की हर योजना हो या किसी की निजी समस्या,उनसे सलाह लिए बिना कोई फैसला नहीं होता। हर व्यक्ति की बात को गंभीरता से सुनना,उसे सम्मान देना और हल निकालना, यही उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। यही सादगी है जिसने एक राजनेता को एक परिवार के बड़े भाई के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया।
*नेता नहीं,सच्चे अर्थों में ‘कप्तान’*
सागर विधानसभा को वे एक जहाज मानते हैं,और स्वयं को उसके कप्तान। एक ऐसा कप्तान जो हर यात्री को पहचानता है,उसकी जरूरत को समझता है। उनकी आवाज में अपनेपन की खनक है, जो हर वर्ग,हर उम्र के व्यक्ति के दिल को छू जाती है। युवाओं के साथ कंधे पर हाथ रखकर आत्मीयता जताना हो या बुजुर्गों की सहायता में दौड़ पड़ना — वे हर भूमिका में सटीक उतरते हैं।
*घर नहीं,जनगृह है उनका निवास*
उनका निवास किसी विशिष्ट स्थान जैसा नहीं लगता,बल्कि पूरे शहर का घर बन चुका है।आम आदमी से लेकर अधिकारी तक,कोई भी व्यक्ति जब चाहे उनसे मिल सकता है,बिना किसी झिझक के।दुख-सुख में सबसे पहले पहुंचना, आपदा की घड़ी में मोर्चा संभालना—उनका व्यक्तित्व एक संवेदनशील प्रहरी की तरह दिखाई देता है, जो सत्ताधारी नहीं बल्कि सेवाधारी है।
*कठिन फैसलों में भी विनम्र नेतृत्व*
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान जब हर कोई भयभीत था, उस समय उन्होंने सामाजिक साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। ‘ऑपरेशन स्मार्ट सिटी’ के अंतर्गत जब पूरे शहर का सौंदर्यकरण हो रहा था और कठिन निर्णय लेने पड़ रहे थे, तब भी उन्होंने जिम्मेदारी से निर्णय लिए, ईमानदारी से क्रियान्वित किए, और जनसंपर्क बनाए रखा।
*धर्म से ऊपर, इंसानियत के साथ खड़ा व्यक्तित्व*
धार्मिक उन्माद के दौर में जब सागर में तूफान उठने को था, तब उन्होंने किसी एक धर्म की नहीं,हर धर्म की रक्षा का दायित्व निभाया। स्वयं को धर्मशून्य कर, एक सच्चे जनप्रतिनिधि की तरह संकट से शहर को बाहर निकाला। यही कारण है कि जनता उन्हें राजा नहीं,एक प्रहरी मानती है, जो हर समय शहर की रक्षा में डटा रहता है।
*परिकल्पनाओं से योजनाओं तक — सागर का पुनर्निर्माण*
शैलेंद्र भैया का सपना है — एक ऐसा सागर जो केवल ऐतिहासिक और शैक्षणिक नगर न हो, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी विश्व मानचित्र पर चमके। लाखाबंजारा झील को उन्होंने जिस तरह विकसित किया है, वह किसी भी हिल स्टेशन की झील से कम नहीं। ‘सिटी फॉरेस्ट’ की परिकल्पना, तालाबों पर पुलों का निर्माण, और अर्बन टूरिज्म की दिशा में उनका प्रयास सागर को महासागर की राह पर ले जा रहा है।
*भविष्य की राह और बुंदेलखंड की पहचान*
सागर अब केवल एक शहर नहीं, बुंदेलखंड का सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र बन रहा है। एरण के ऐतिहासिक स्थल, राहतगढ़ का धार्मिक महत्व और धामोनी का किला — सबको जोड़कर उन्होंने एक व्यापक पर्यटन सर्किट तैयार करने का बीड़ा उठाया है। अब सागर केवल मध्य प्रदेश का नहीं, देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
*शैलेंद्र भैया — नाम नहीं, भावना हैं*
राजनीति में बहुत लोग आते हैं, कुछ याद रहते हैं और कुछ इतिहास बन जाते हैं। लेकिन शैलेंद्र जैन जैसे लोग यादों में नहीं, रिश्तों में बसे रहते हैं। वे केवल जनप्रतिनिधि नहीं, जनमन के प्रतिबिंब हैं।
उनके जन्मदिवस पर यह शुभकामना केवल औपचारिक नहीं, सागर की जनता के दिल से निकली वह भावना है, जो कहती है:
*ऐसे ही रहिए शैलेंद्र भैया — सादगी, समर्पण और सेवा के प्रतीक।*
(लेखक:- श्रीकांत जैन भारतीय जनता पार्टी जिला सागर के मीडिया प्रभारी है)




