गोविंद सिंह राजपूत पर सीधा हमला, भार्गव-भूपेंद्र को बताया ‘शुद्ध भाजपा’; बंडा के पीड़ित परिवारों की मदद का ऐलान
सागर
बंडा शराब त्रासदी ने जहां प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया है, वहीं अब इस मामले ने सागर की सियासत में भी नया मोड़ ला दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर ऐसा राजनीतिक हमला बोला, जिसने जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
दिग्विजय सिंह ने गोविंद सिंह राजपूत को “पंजा छाप भाजपा” बताते हुए पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को “शुद्ध भाजपा” करार दिया। उनके इस बयान को भाजपा की अंदरूनी राजनीति और पुराने भाजपा कैडर बनाम सिंधिया समर्थक नेताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘इस परिवार को दशकों से जानता हूं…’
दिग्विजय सिंह ने राजपूत परिवार के पुराने राजनीतिक इतिहास को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वे इस परिवार को दशकों से जानते हैं। गुलाब सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष रहने के समय की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल किया कि उस समय परिवार के पास क्या था और आज उसकी राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति क्या है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्ष 2018 की राजनीति का जिक्र करते हुए परिवहन विभाग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ सरकार बनने के बाद परिवहन विभाग को लेकर दबाव और कथित अवैध कमाई का खेल शुरू हुआ था। उन्होंने सौरभ शर्मा प्रकरण का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि बड़े लोगों तक जांच क्यों नहीं पहुंची और कार्रवाई छोटे कर्मचारी तक क्यों सीमित रह गई। ये आरोप दिग्विजय सिंह के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बंडा के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने का ऐलान
राजनीतिक हमले के बीच दिग्विजय सिंह ने बंडा शराब त्रासदी के पीड़ित परिवारों के लिए मदद का भी ऐलान किया। उन्होंने चार परिवारों को गोद लेने की घोषणा करते हुए प्रत्येक परिवार को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई में सहयोग देने की बात कही।
उन्होंने कांग्रेस जिलाध्यक्ष और स्थानीय नेताओं से भी पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
नौनागिर-बरोदिया कांड भी बना निशाना
दिग्विजय सिंह ने नौनागिर-बरोदिया हत्याकांड का जिक्र करते हुए अपने पुराने रुख की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पीड़ित दलित महिला को अपनी बहन माना था, लेकिन बाद में आरोपियों के साथ कथित समझौते की स्थिति सामने आई। इस मुद्दे को भी उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर सवाल खड़े किए।
बंडा कांड ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
बंडा क्षेत्र में कथित जहरीली और अवैध शराब से हुई मौतों ने प्रदेश की राजनीति को पहले ही गर्म कर रखा है। पुलिस और प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहे हैं तथा अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े आरोपियों पर शिकंजा कसने की कार्रवाई जारी है।
इसी माहौल में दिग्विजय सिंह का “पंजा छाप भाजपा” वाला बयान सागर की राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है। बयान के राजनीतिक मायने इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इसमें एक तरफ सिंधिया समर्थक खेमे के नेता गोविंद सिंह राजपूत को निशाना बनाया गया, तो दूसरी ओर भाजपा के पुराने नेताओं को उनसे अलग खड़ा किया गया।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि दिग्विजय सिंह के इस हमले पर भाजपा और खासकर गोविंद सिंह राजपूत की ओर से क्या पलटवार सामने आता है।




